नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। आजादी की लड़ाई में 1500 से अधिक जनजातीय महिला, पुरुषों और बच्चों के बलिदान की गवाह रही मानगढ़ धाम की धरती को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग फिर उठी है। वनवासी कल्याण परिषद ने प्रधानमंत्री के
नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने और इसके गौरवशाली इतिहास को पाठ्य-पुस्तकों में शामिल करने की मांग की है।परिषद के अनुसार, 17 नवंबर 1913 को संत गोविंदगुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ धाम पर गोलीबारी की थी। इस घटना में 1500 से अधिक जनजातीय लोगों के शहीद होने का उल्लेख है। परिषद ने इसे जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पहले हुआ बड़ा नरसंहार बताते हुए जनजातीय समाज के बलिदान को राष्ट्रीय इतिहास में उचित स्थान देने की आवश्यकता जताई।ज्ञापन में मांग की गई कि राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की पाठ्य-पुस्तकों में
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