नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि शिक्षक के आचरण, समर्पण और विद्यालय के वातावरण से भी बच्चों का भविष्य संवरता है। इन दिनों जहां कुछ महिला शिक्षिकाओं के विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया
रील्स बनाने के वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर नीमच में ऐसे शिक्षक भी हैं जो अपने निजी खर्चे से स्कूल की रंगाई-पुताई कर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में जुटे हैं। यह तस्वीर शिक्षा व्यवस्था के दो विपरीत पहलुओं को सामने लाती है। एक ओर शिक्षक बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के लिए अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक सोशल मीडिया पर लाइक, व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में अपनी जिम्मेदारियों से भटकते नजर आए। इसके साथ ही शहर के कई शासकीय विद्यालय आज भी जर्जर और खंडहरनुमा भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां बरसात के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता
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