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नीमच।महेंद्र उपाध्याय।भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी पर बुधवार को शहर सहित अंचल में गणे
शोत्सव हर्ष और उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ। सर्वार्थ सिद्धि, रवि और लक्ष्मीनारायण जैसे शुभ योग में घर-घर और पंडालों में विघ्नहर्ता गणपति विराजमान हुए। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुनों पर झूमते श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं को लेकर पंडालों तक पहुंचे। शहर में इस वर्ष 125 से अधिक स्थानों पर गणपति की स्थापना की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
*परंपरा और श्रद्धा का संगम*
हिंदू मान्यता के अनुसार गणेशजी प्रथम पूजनीय देवता हैं। उनके पूजन से विघ्नों का नाश होता है और बुद्धि, बल व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म अध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए चतुर्थी के दिन दोपहर
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